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सोनीपत में यमुना नदी का जलस्तर अब कम होना शुरू हो गया है, जिससे ग्रामीणों ने थोड़ी राहत की सांस ली है। हालांकि, बाढ़ और बारिश से किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। सैकड़ों एकड़ खेत कटकर यमुना में समा गए हैं और हजारों एकड़ फसल पानी में सड़ चुकी है। इससे न सिर्फ किसानों को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। सोनीपत में बागपत गौरीपुर पुल से यमुना के पानी को मापा जाता है और वहां पर यमुना के पुल के नीचे पिलर पर 216.5 गेज डेंजर लेवल माना जाता है। हरियाणा में सोनीपत की तरफ डेंजर लेवल से काफी नीचे पानी बह रहा है। ग्रामीणों द्वारा जानकारी दी गई है कि करीबन 5 से 6 फुट पानी कम हुआ है।
वहीं गनौर के गांव बेगा में भी जलस्तर यमुना का काम हो गया है और अब ठोकर के बीच से ही यमुना बह रही है। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन यमुना के किनारों पर पत्थर की ठोकर लगता है। पहले यमुना ठोकरों को पार करके बंदे के नजदीक तक बह रही थी। खेतों का कटाव और फसलें बर्बाद यमुना नदी के उफान से बांध के भीतर सैकड़ों एकड़ भूमि का कटाव हो चुका है। खेत समतल हो गए हैं और पहचानना मुश्किल है कि किसका खेत कहां था। धान और सब्जियों की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। राई और कुंडली इलाके में स्वीट कॉर्न की फसल पर भी पानी फिर गया है। किसानों का कहना है कि बीज, दवाइयों और मजदूरी पर लाखों का खर्च किया था, लेकिन सारी मेहनत डूब गई। किसानों का लाखों का नुकसान स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों को प्रति एकड़ लाखों रुपए का घाटा झेलना पड़ा है। मजदूरों की रोज़ी-रोटी पर भी असर पड़ा है। यमुना का पानी खेतों में घुसने और आवश्यकता से अधिक हुई बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब किसान सरकार से गिरदावरी और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या भटगांव समेत कई गांवों में घरों और गलियों में अभी भी पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर गांव से पानी निकासी की मांग की है। स्थिति ऐसी है कि लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशान हैं और गांवों में सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित टोकी मनौली गांव का सरकारी स्कूल जलभराव के चलते बंद पड़ा है। पिछले पांच दिनों से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। गांव के वे बच्चे भी प्रभावित हैं जिन्हें पांचवी के बाद मनौली जाकर पढ़ाई करनी होती थी। सैकड़ों बच्चे इस आपदा के चलते शिक्षा से वंचित हो गए हैं। मानसून ने तोड़ा रिकार्ड इस बार मानसून सीजन में सोनीपत में सामान्य से 48% अधिक बारिश हुई है। 1 जून से 4 सितंबर तक जिले में 533.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। गन्नौर से लेकर दिल्ली के पल्ला तक यमुना नदी ने हजारों एकड़ फसल तबाह कर दी है। कई गांवों के बाग-बगीचे भी नदी में बह गए हैं। राहत की उम्मीद, पर चिंता बरकरार शुक्रवार को यमुना नदी का पानी 5 से 6 फीट कम हुआ है। हालांकि खेतों से पानी अभी तक नहीं निकला है। हरे चारे की कमी के चलते दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, 8 सितंबर को सोनीपत, रोहतक और गुरुग्राम समेत कई जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। सोनीपत के डीसी का बयान
सोनीपत के डीसी सुशील सारवान का कहना है कि पूरी मुस्तैदी के साथ बाढ़ का सामना करने को लेकर प्रयास किए गए हैं। डीसी ने कहा कि टोकी मनौली में वह स्वयं गए हैं। वहीं यमुना से सटे हुए गन्नौर क्षेत्र का भी दौरा किया गया है। किसी भी प्रकार का जान माल का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों के साथ राजस्व विभाग के अधिकारी निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। खाद्य सामग्री भी भेजी जा रही है।
वहीं जिले के अलग-अलग हिस्सों में हुए जल भराव को लेकर भी उन्होंने कहा है कि गिरदावरी का कार्य जल्द शुरू होगा। सभी सर्कल में क्षति पूर्ति पोर्टल जल्द ही खोल दिया जाएगा।
वही टोकी मनौली गांव के लोगों के आरोप को लेकर उन्होंने कहा कि वे खुद दो बार वहां गए हैं और सुबह शाम वहां पर खाना दिया जा रहा है।


