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सोनीपत का खानपुर मेडिकल कॉलेज इलाज से ज्यादा रेफर सेंटर बन गया है। पिछले तीन महीनों में यहां से 250 से ज्यादा मरीज रेफर किए गए।
जहां भाजपा विधायक और कमेटी अध्यक्ष रामकुमार कश्यप ने अव्यवस्थाओं को “छोटी-मोटी समस्याएं” बताते हुए सुधार का भरोसा दिया, वहीं बरोदा से कांग्रेस विधायक इंदु राज भालू ने इसे “रेफर का अड्डा” करार दिया। मरीजों ने भी अपनी परेशानी सुनाते हुए कहा कि एक्स-रे जैसी बुनियादी जांच के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। विधानसभा समिति की जांच और सामने आई अव्यवस्थाएं
वीरवार को विधानसभा की 9 सदस्यीय कमेटी ने खानपुर मेडिकल का दौरा किया। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के विधायक इसमें शामिल हुए। टीम ने सीवरेज, बिजली, खराब एसी और डॉक्टरों के उपकरणों की कमी का जायजा लिया। इस समिति में कांग्रेस और भाजपा के नौ विधायक शामिल थे। जांच के दौरान, कई बड़ी कमियां सामने आईं:
बिजली और एसी की समस्या: मेडिकल कॉलेज में खराब एसी और बिजली की समस्या आम है।
खराब सीवरेज सिस्टम: सीवरेज व्यवस्था भी पूरी तरह से बंद है, जिसके कारण बारिश में मेडिकल कॉलेज में पानी भर जाता है।
डॉक्टरी उपकरणों की कमी: इलाज के लिए जरूरी कई मेडिकल उपकरण खराब या अनुपलब्ध पाए गए।
समिति ने इन समस्याओं को एक निश्चित समय सीमा में ठीक करने के निर्देश दिए हैं।
मरीजों का दर्द और लंबा इंतजार
मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज घंटों तक कतार में खड़े रहते हैं, खासकर एक्स-रे जैसी सामान्य जांच के लिए। मरीजों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में चार से पांच एक्स-रे मशीनें होने के बावजूद, केवल एक ही काम करती है, जिससे मरीजों को 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। पैर टूटने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को भी घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि जान-पहचान वाले लोगों का काम पहले होता है, जबकि बाकी लोग धक्के खाते रहते हैं।
विधायक रामकुमार कश्यप और इंदूराज भालू के अलग-अलग विचार
इस मामले पर विधायकों के विचार भी बंटे हुए नजर आए। भाजपा विधायक और समिति के अध्यक्ष रामकुमार कश्यप ने मेडिकल की इन कमियों को “छोटी-मोटी समस्याएं” बताया। उन्होंने दावा किया कि सरकार अच्छा काम कर रही है और मेडिकल में मशीनें लगाई गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली की समस्या सबसे बड़ी है, जिसे ठीक करने में छह महीने तक का समय लग सकता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक इंदूराज भालू ने इन समस्याओं को उजागर करते हुए कहा कि खानपुर मेडिकल अब ‘रेफर का अड्डा’ बन चुका है। उन्होंने कहा कि 2022 से यहां ज्यादातर एसी खराब हैं और छत भी पूरी तरह से खराब हो चुकी है। भालू ने आरोप लगाया कि बजट की कमी के कारण ये कमियां दूर नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल कॉलेज भेदभाव का शिकार हुआ है और सरकार ने इसके लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया है। डायरेक्टर की सफाई मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर जगदीश चंद्र ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि रेफरल सिस्टम को खत्म करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा है कि भविष्य में केवल कंसलटेंट की जानकारी के बाद ही मरीज को रेफर किया जाएगा और कोई भी जूनियर डॉक्टर सीधे मरीज को रेफर नहीं कर सकेगा। यह दर्शाता है कि मेडिकल प्रशासन भी इस समस्या से अवगत है और इसे दूर करने का प्रयास कर रहा है।
इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट है कि सोनीपत का खानपुर मेडिकल कॉलेज इस समय कई गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। मरीजों को बेहतर हेल्थ सेवाएं देने के बजाय, उन्हें परेशानियों में डाल रहा है। यह देखना होगा कि विधानसभा समिति और मेडिकल प्रशासन द्वारा किए गए वादे कब तक पूरे होते हैं।


