Shardiya Navratri 2020: सागर जिले में सजा है मां ज्वाला देवी का दरबार नवरात्र पर उमड़ रहे श्रद्धालु

0
1


Publish Date: | Sun, 18 Oct 2020 05:11 PM (IST)

Shardiya Navratri 2020 राजकुमार यादव। जरुवाखेड़ा। मां ज्वाला देवी का प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर विंध्यगिरी पर्वत माला की श्रृंखला में लगभग 750 फीट ऊंचाई पर है। सुरखी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले जलंधर गांव स्थित यह शक्ति पीठ अति प्राचीन है। यहां जाने के लिए आपको सबसे पहले जरुवाखेड़ा रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर उतरना पड़ेगा। यहां से चांदामऊ, लुहर्रा गांव होते हुए मां ज्वाला देवी के दरबार तक पहुंचा जा सकता है। यह शक्ति पीठ तंत्र साधना से जुड़े लोग खास महत्व रखता है।

मां ज्वाला की प्रतिमा भव्यता सभी को आश्चर्यचकित करती है। यहां सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती हैं। यहां चार फुट पाषाण की ऊंची मां ज्वाला देवी की मूर्ति पद्मासन मुद्रा में दो शेरों पर सवार है। दाहिने पैर के अंगूठे से सटा हुए एक कलश स्थापित है। मां के पीछे चक्र उकरा हुआ है। शरीर के तीनों और नौ देवियों के चित्र अंकित हैं। इससे स्वयंमेव सिद्ध होता है कि यह सिद्घ तांत्रिक शक्तिपीठ है।

श्री गणेशजी की विलक्षण प्रतिमा विराजित है। बाजू में नवमूर्ति भी विराजित है। यह मंदिर 200 साल पहले तक एक छोटी सी मढ़िया हुआ करता था, लेकिन पहाड़ी पर बड़ा ही सुंदर व भव्य मंदिर बन हुआ है। मां ज्वाला देवी की कई चमत्कारी कार्य है, जिनका लोग आज भी व्याख्यान करते हैं। मां यहां पर पद्मासन की मुद्रा में विराजमान हैं।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि मां के चरणों के पास अमृत कलश रखा है और मां 14 देवियों के साथ गरूड़, नंदी, हनुमान भैरवनाथ सिंहासन पर आसीन हैं। यहां हर साल चेत्र व शारदेय नवरात्र पर हजारों द्वारा दर्शनों के लिए आते हैं। नवरात्र की पंचमी, अष्टमी व नवमीं के दिन मां के दर्शन करने लाखों की संख्या में लोग आते हैं। मंदिर से कुछ ही दूरी पर मंजीरा घाटी पड़ती है।

जहां आज भी दो पत्थरों को आपस में रगड़ने से मंजीरा बजने की आवाज आती हैं। छत्रसाल की सोठ के पास एक बड़ा चमत्कारी पत्थर पड़ा हुआ था जिस पर लोग कपड़े धोते थे तो उसमें से बगैर साबुन के ही झाग एवं कपड़े साफ निकलते थे, लेकिन उसी पत्थर पर महिलाओं के द्वारा कपड़े धोने पर वहां सांप निकल कर आ जाते थे। छत्रसाल की सोठ पर आज भी दीवारों के निशान देखने को मिलते हैं। ऐसा कहा जाता है कि महाराजा छत्रसाल की मां ज्वाला देवी के प्रति असीम आस्था थी। वे चेत्र मास की नवरात्र पर यहां आकर पूजा-उपासना किया करते थे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020

 



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here