कैसे पलटी थी विकास दुबे की गाड़ी? अब तक नहीं मिला एनकाउंटर पर यूपी पुलिस की थिअरी का खंडन करने वाला चश्मदीद

0
1


कानपुर
विकास दुबे और उसके गुर्गों के एनकाउंटर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से गठित जस्टिस चौहान आयोग को पुलिस थिअरी के खिलाफ कोई गवाही नहीं मिली है। पैनल का कहना है कि अभी तक किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने अपनी गवाही में पुलिस के बयान का खंडन नहीं किया है। बता दें कि 10 जुलाई को विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया था। उसके गैंग के कई साथी भी मारे गए थे। यूपी पुलिस के एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुठभेड़ की जांच के लिए आयोग का गठन किया था।

बता दें कि 2-3 जुलाई की रात को कानपुर पुलिस की एक टीम विकास दुबे को पकड़ने के लिए चौबेपुर के सतरू गांव पहुंची थी। हालांकि विकास को पुलिस की दबिश की जानकारी पहले मिली थी। उन्होंने अपने गुर्गों के साथ मिलकर पुलिसकर्मियों को मारने की साजिश रची। विकास दुबे और उसके साथियों ने सतरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की निर्दयता से हत्या कर दी थी। विकास और उसके गुर्गे घटना के बाद से ही फरार थे।

विकास दुबे को दबोचने से पहले यूपी पुलिस ने चार अलग-अलग एनकाउंटर में विकास दुबे के साथियों को को किया था। इसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने विकास दुबे कोजैन के महाकाल मंदिर परिसर से पकड़ा था। यूपी पुलिस का दावा है कि जब एटीएस की टीम विकास दुबे को कानपुर ले आ रही थी तो काफिले में एक वाहन शामिल था। मौका देखकर विकास दुबे ने पुलिस की पिस्टल छीनकर फरार होने की कोशिश की जिसके बाद जवाबी फायरिंग में वह मारा गया।

एनकाउंटर पर सवाल उठने पर सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को पूर्व जज बीएस चौहान के नेतृत्व में आयोग का गठन किया और दो महीने के अंदर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में कोर्ट ने रिपोर्ट सौंपने की अवधि एक महीने और बढ़ा दी थी। पैनल ने एनकाउंटर साइट देखी और प्रत्यक्षदर्शियों की तलाश में लोगों से बात की। एक सूत्र ने बताया, आयोग ने प्रत्यक्षदर्शियों को सामने आकर बयान देने का काफी प्रचार किया लेकिन रिस्पॉन्स ठंडा रहा।

आयोग को सबसे ज्यादा अटपटा यह लगा कि पुलिस के काफिले के पीछे-पीछे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टीम की कई गाड़ियां चल रही थीं, कई न्यूज रिपोर्ट में एनकाउंटर पर सवाल भी उठाए गए लेकिन कोई भी मीडियापर्सन आयोग के पास गंगावाद नहीं आया।

सूत्र के मुताबिक, यहां तक ​​कि दुबे के रिश्तेदार भी पैनल को अपना बयान देने नहीं आए। ऐसे में ज्यादातर पुलिस गवाहों ने 10 जुलाई के एनकाउंटर की कहानी सुनी थी। 22 जुलाई को पूर्व न्यायाधीश बीएस चौहान, इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस एसके अग्रवाल और यूपी के पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता की अगुवाई में एक आयोग का गठन किया गया था। कोर्ट ने इस आयोग से अपनी रिपोर्ट दो महीने के भीतर सौंपने का आदेश दिया था।





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here