छात्र राजनीति के ‘गुरुकुल’ इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ का गठन कब हुआ? 92 दिन से अनशन

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प्रयागराज
छात्र राजनीति की नर्सरी कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघटन नहीं होने से छात्र नाराज हैं। छात्र संघटन किए जाने की मांग को लेकर पिछले 92 दिनों से छात्र अनशन पर हैं। तीन महीने पूरा होने वाला है लेकिन छात्रों की मांग पर अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया है। समाजवादी छात्र सभा के इस फैसले को अनशन को अबवीपी को छोड़कर कई राजनीतिक दल और सभी छात्र संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है।

छात्र संघ को स्पष्ट करना छात्र परिषद का गठन
2018 में छात्र संघ चुनाव के बाद 2019 में छात्र संघ को स्पष्ट कर छात्र परिषद का गठन किया गया। प्रशासन ने छात्र परिषद चुनाव की तिथि घोषित कर चुनाव भी करवाने की प्रक्रिया शुरू की लेकिन छात्रों की एकजुटता की वजह से छात्र परिषद में किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन पर्चा दाखिल नहीं किया। जिन्होंने दाखिला भी किया तो उन छात्रों ने अपना नाम वापस ले लिया। इस विवरण में सभी छात्र संगठन इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो गए और छात्र परिषद का गठन नहीं दिया गया।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 2005 से 2012 तक छात्र संघ चुनाव होने बंद हो गए। इसके बाद 2012 से 2018 तक छात्र संघ चुनाव लगातार होते रहे। 2019 में छात्र संघ को स्पष्ट कर छात्र परिषद बनाया गया, लेकिन परिषद के गठन के लिए उम्मीदवार नहीं मिले लिहाजा छात्र परिषद शून्य हो गया।

छात्र संघ चुनाव में समाजवादी छात्र सभा का दबदबा रहा
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में समाजवादी छात्र सभा का काफी दबदबा रहा है। पिछले 10 साल के छात्र संघ चुनाव में ज्यादातर समाजवादी छात्र सभा के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए और अगर अध्यक्ष नहीं हुए तो हर चुनाव में समाजवादी छात्र सभा का उम्मीदवार कई पदों पर जीत हासिल करता है। वहीं छात्र संघ चुनाव ना होने से विश्वविद्यालय में समाजवादी छात्र सभा का राजनीतिक करियर गिरता नजर आ रहा है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 90 दिनों से अधिक समय से प्रभावित अनशन पर बैठे समाजवादी छात्र सभा के छात्र नेता अजय यादव सम्राट का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघ चुनाव पर रोक लगाकर हटाकर छात्रसंघ बहाल कर देगा। समाजवादी पार्टी की इकाई समाजवादी छात्र सभा ने छात्र संघ चुनाव में अकसर जीत दर्ज की है इसलिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय को समाजवादी सियासत का गढ़ भी कहा जाता है।

चुनाव में शगुन के तौर पर फूटते हैं देसी बम
छात्र संघ चुनाव में कई परंपरा रही लेकिन एक परंपरा आज भी चर्चा में है। छात्र संघ चुनाव के दक्षता भाषण से पहले देसी बम को शगुन के तौर पर फोड़ा जाता था। यह परंपरा हर चुनाव में अपनाई जाती थी। छात्र संघ के पूर्व महामंत्री बाबा अवस्थी कहते हैं कि बम फोड़ने की परंपरा बहुत पुरानी है और यह बम किसी को नुकसान के लिए नहीं फोड़े जाते थे बल्कि युवाओं में जोश भरने के लिए ऐसा किया जाता था। साथ ही पुलिस को तलाश भी किया गया था कि हमारा अध्यक्ष कमजोर नहीं है और बहुत मजबूत है और ये पुलिस की आर्कलूसी भी नहीं होगी।

हालांकि बाबा यह भी कहते हैं कि इस देसी बम में किसी प्रकार का लोहा या नुकसानदेह चीजें को इस्तेमाल नहीं किया जाता था। हालांकि अब इसको अपराध की श्रेणी में रखा जाता है। बमबारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर एन के शुक्ला कहते हैं कि छात्र संघ चुनाव और चुनाव का निर्णय एग्जिक्यूटिव काउंसिल ले लिया है। हम लोग हमेशा से छात्रों के हित में रहे हैं और छात्रों से अपील करते हैं को लाभांश -19 काल में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें। किसी भी छात्र को किसी भी प्रकार की हानि नहीं होनी चाहिए। छात्र संघ चुनाव का मामला कोर्ट में भी लंबित है। काउंसिल और कोर्ट का जो फैसला होगा उसी आधार पर हम काम करेंगे।





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