Action Punjab

Breaking News

Labor crisis in front of industry amid fears of lockdown in Delhi-Maharashtra | दिल्ली-महाराष्ट्र में लॉकडाउन की आशंका के बीच इंडस्ट्री के सामने लेबर का संकट


Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

अमृतसर3 मिनट पहलेलेखक: हरजिंदर सिंह

  • कॉपी लिंक
  • अमृतसर की फैक्ट्रियों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की घर-वापसी शुरू, टैक्सटाइल इंडस्ट्री पर असर, पिछले साल गए आधे मजदूर अब तक नहीं लौटे

कोरोना महामारी के फिर जोर पकड़ने और दिल्ली-महाराष्ट्र में लॉकडाउन की आशंकाओं के बीच अमृतसर में इंडस्ट्री के सामने मजदूरों का संकट फिर गहराने लगा है। मजदूरों को डर है कि महाराष्ट्र और दिल्ली के बाद पंजाब में भी लॉकडाउन लग सकता है। ऐसे में उन्होंने अपने राज्य लौटना शुरू कर दिया है। इससे शहर के उद्योगपति चिंतित हैं। उद्यमियों का कहना है कि इंडस्ट्री पिछले साल के लॉकडाउन की मार से ही पूरी तरह उबर नहीं पाई और अब एक बार फिर मजदूरों के पलायन से प्रोडक्शन पर असर पड़ने लगा है।

अमृतसर में 2020 के लॉकडाउन के चलते इंडस्ट्री 55 दिन बंद रही थी। उस समय लाखों मजदूर अपने-अपने राज्य चले गए थे। अक्टूबर-2020 के बाद मजदूर वापस आने लगे मगर अभी तक इंडस्ट्री पुरानी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है।

महाराष्ट्र-दिल्ली में सख्ती बढ़ने से इंडस्ट्री को नहीं मिल रहे नए ऑर्डर

अमृतसर में टैक्सटाइल, राइस मिलिंग, यार्न निटिंग, हैंडीक्राफ्ट, नट-बाेल्ट, स्क्रू और पंखे बनाने की बड़ी इंडस्ट्री है। महाराष्ट्र-दिल्ली में कोरोना संक्रमण बेकाबू होने के बाद वहां की सरकारों ने कई तरह की पाबंदियों का ऐलान कर दिया है जिसका असर इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। इन दोनों ही राज्यों से अमृतसर के उद्योगों को नए ऑर्डर मिलने अचानक कम हो गए हैं।

अमृतसर फाेकल प्वांइट के यूनिट्स में तकरीबन 20 हजार मजदूर काम करते हैं। पूरे अमृतसर के उद्योगों की बात करें तो पिछले साल लॉकडाउन से पहले यहां यूपी, बिहार, ओडिशा, पूर्वांचल और दूसरे राज्यों के तकरीबन 2 लाख मजदूर काम करते थे। लॉकडाउन के दौरान इनमें से ज्यादातर वापस चले गए और उनमें से अभी भी आधे से ज्यादा वापस नहीं लौटे। जो मजदूर लौटे थे, अब अगर वह भी वापस चले गए तो इंडस्ट्री के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी।

दो एसोसिएशन ने मानी लेबर संकट की बात

अभी पिछले साल की मार से ही नहीं उभरी इंडस्ट्री : डालमिया
पिछले साल के लॉकडाउन में अमृतसर की इंडस्ट्री की कमर ही टूट गई थी। अब एक बार फिर मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। हालांकि पंजाब में अभी तक इंडस्ट्री बंद करने के कोई आदेश नहीं आए हैं और मजदूर अपने स्तर पर ही घर लौट रहे हैं। इससे उत्पादन पर असर पड़ने लगा है।
– कमल डालमिया, प्रधान, फाेकल प्वांइट एसेसिएशन

डर का माहौल, मजदूर जा रहे : कृष्ण शर्मा

अमृतसर की टैक्सटाइल इंडस्ट्री की सबसे बड़ी मार्केट महाराष्ट्र और मुंबई में है। वहां लॉकडाउन लग जाने से नए आॅर्डर नहीं मिल रहे। दूसरे राज्यों का माहौल देखकर पंजाब में काम करने वाले मजदूरों के अंदर भी डर बैठ गया है। इसलिए उन्होंने पहले ही पलायन करना शुरू कर दिया है।

– कृष्ण शर्मा कुक्कू, प्रधान, अमृतसर टैक्सटाइल प्रोसेसर एसोसिएशन

वेडिंग सीजन और यूपी में पंचायत चुनाव के चलते जा रहे लोग

पंजाब सरकार इंडस्ट्री को पूरा सपोर्ट दे रही है। रात में भी कारखाने और मिल चलाई जा रही हैं इसलिए फिलहाल अमृतसर के उद्योगों में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर टिके हुए हैं। हालांकि शादियों के सीजन, यूपी में पंचायत चुनाव और वहां फसलों की कटाई के चलते कुछ परिवार यहां से जा रहे हैं।

डाॅ. जेपी सिंह, और रामभवन गोस्वामी, उत्तर प्रदेश कल्याण परिषद

फिलहाल अमृतसर में मजदूरों की कमी नहीं : खोसला

अमृतसर की इंडस्ट्री के सामने फिलहाल मजदूरों की कोई कमी नहीं है क्योंकि पंजाब में अभी लॉकडाउन लगाने जैसी कोई स्थिति नहीं है। प्रदेश सरकार ने भी ऐसे कोई आदेश नहीं दिए हैं।
संदीप खोसला, प्रधान, फाेकल प्वांइट इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन

31 मई तक बिहार जाने वाली ट्रेनों में नहीं मिल रहे टिकट : यादव

रोजाना 2 से 3 प्राइवेट बसें जा रहीं यूपी-बिहार, पहले यूपी का किराया 1200 रुपए था, जो अब हो गया 1700 रुपए

गुरु नानक ऑडिटोरियम के पास यूपी जाने को तैयार खड़ी बस। (इनसेट) ट्रैवल एजेंटों के काउंटरों पर यूपी-बिहार के जिलों के नाम विशेष तौर पर लिखे गए हैं।

अमृतसर बस स्टैंड के पास गुरु नानक ऑडिटोरियम के नजदीक से रोज दो से तीन प्राइवेट बसें यूपी और बिहार के लिए निकल रही हैं। पहले इन बसों का किराया एक हजार से 1200 रुपए हुआ करता था, लेकिन अब 1600 से 1700 रुपए प्रति व्यक्ति कर दिया गया हैै।

राष्ट्रीय बिहार विकास मंच के प्रधान अर्जुन यादव का कहना है कि वह खुद बिहार के रहने वाले हैं। यहां पर निटिंग की मिलों में ठेकेदारी का काम करते हैं। उनके पास पहले 400 से ज्यादा लेबर थी, जो अब आधी रह गई है। पिछले एक महीने में ढाई हजार के करीब लोग वापस जा चुके हैं। 29 अप्रैल को 180 लोग कोलकाता मेल से बिहार जा रहे हैं। 80 परिवार और जाने के लिए तैयार बैठे हैं, लेकिन ट्रेनों में 31 मई तक टिकट नहीं मिल रही।

खबरें और भी हैं…



Source link

Other From The World

Related Posts

Treading News

Latest Post

Unlawful shops will open in Jalandhar from 9 am to 3 pm from Monday to Friday, if the Corona precautions are broken, the shop will be sealed for 7 days | जालंधर में सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक खुलेंगी गैरजरूरी दुकानें, कोरोना सावधानियां तोड़ी तो 7 दिन के लिए सील होगी दुकान

After the meeting with the minister, the strike of the revenue officers of Punjab postponed till 21, there will be a registry in the tehsils from Thursday. | मंत्री गुरप्रीत कांगड़ के साथ बैठक के बाद पंजाब के रेवेन्यू अफसरों की हड़ताल 21 तक टली, गुरुवार से तहसीलों में होगी रजिस्ट्री